खबरीलाल विशेषरायपुर

खबरीलाल विशेष :: CSPDCL में चेयरमैन के पद पर टेक्नोक्रैट की नियुक्ति होनी चाहिए कि आईएएस अफसर की ???

रमन सरकार के समय से सीएसपीडीसीएल में चेयरमैन पद पर आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही थी। जिसमे पूर्व आईएएस शिवराज सिंह भी काफी लंबे समय तक इस चेयरमैन नुमा कुर्सी में काबिज रहे।

15 वर्षों बाद जब सरकार बदली और भुपेश ने नए सरकार की बाग डोर संभाली तब उन्होंने इंजीनियर शैलेन्द्र शुक्ला को सीएसपीडीसीएल का चेयरमैन नियुक्त किया और सीएम भुपेश का जो सपना था “बिजली बिल हाफ” और “24 घण्टे बिजली की आपूर्ति”। नए अध्यक्ष ने सीएम के मंशानुरूप कार्य किये, बिजली बिल हाफ हुआ, बिना बाधा के बिजली 24 घण्टे आपूर्ति होने लग गए। इसके बाद उपभोक्ताओं के सहूलियत के लिए पूर्व चेयरमैन शैलेन्द्र शुक्ला ने “मोर बिजली अप्प” बनवाया जिससे उपभोक्ता बिजली बिल अपने मोबाइल से पटा सके, शिकायत दर्ज कर सके व अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई।

अचानक ऐसा क्या हुआ कि रातों रात सीएसपीडीसीएल के चेयरमैन पद से शैलेन्द्र शुक्ल जैसे टेक्नोक्रैट ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सीएम भुपेश बघेल का दिल आईएएस सुब्रत साहू पर आ गया। आईएएस सुब्रत साहू को एसीएस गृह, एसीएस टू सीएम और सीएसपीडीसीएल का चेयरमैन नियुक्त कर दिए। वाह रे सरकार, एक व्यक्ति और इतने सारे महत्त्वपूर्ण विभाग। ये कुछ ज्यादा महेरबानी तो नहीं हो गया ?

टेक्निकल जगहों पर हमेशा टेक्नोक्रेटों की नियुक्ति होनी चाहिए तभी विभाग सुचारू रूप से चल सकता है। एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर जो शुरवाती जीवन जमीन में, फ्लोर पर रहकर कार्य किये होंगे उन्ही को मालूम है कि बायलर को कैसे चलाना है, टरबाइन को कैसे रोटेट करना है, लाइन लॉस को कैसे रोकना है, कोल् कंसम्पशन कितना होना चाहिए एक यूनिट बिजली उत्पादन के लिए, कब शटडाउन लेना है व इत्यादि।

क्या एक आईएएस इन सभी का ज्ञान रखते हैं ? इतने सारी जिम्मेदारी के बाद क्या आईएएस एसीएस सुब्रत साहू को विद्युत मण्डल के चेयरमैन के रूप में अपने जिम्मेदारी का पालन कर रहे हैं या अधिनस्त अधिकारियों पर छोड़ कर रखे हैं या वे जैसा बोलते हैं वैसा कर देते हैं।

आईएएस मतलब ये नहीं कि उन्हें प्रत्येक विषय का भरपूर ज्ञान हो खासकर टेक्निकल विषयों की जैसे विद्युत मण्डल, चिप्स, सोलर एनर्जी, हाइड्रो पावर, फ्यूज, कंडुक्टर, ट्रांसमीटर, एसए फैन, पिए फैन, लाइट उप, वाटर वाल, स्टीम, वेस्ट हीट व आदि।

इतने महीने हो जाने के बावजूद सीएम भुपेश बघेल ने पूर्व चेयरमैन शैलेन्द्र शुक्ला को अभी तक कोई सम्मानजनक पद नहीं दिए हैं। क्या सीएम भुपेश की इंजीनियर शैलेन्द्र शुक्ला से कोई नाराजगी है या कोई और बात है। जो भी हो प्रदेश के हित को देखते हुए सब को दरकिनार कर एक योग्य व्यक्ति को उनका सम्मान देना चाहिए।

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close
Close