खबरीलाल का विशेष लेखरायपुर

Khabrilal विशेष :: अजित जोगी के बाद कौन ? परिवारवाद की राह पकड़ेंगे या नया कुछ करेंगे ?

जी हाँ, आपने सही पढ़ा कि अजित प्रमोद कुमार जोगी के बाद कौन ? कांग्रेस से इस्तीफा देने के पश्चात सन 2016 में जोगी जी ने बनाई थी नई राजनीतिक पार्टी जिसका नाम रखा था “जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)”। वे इस पार्टी के सुप्रीमो थे और अपने बेटे अमित जोगी को इस काबिल भी बनाना चाह रहे थे कि उनके बाद उनके द्वारा कड़ी मेहनत से खड़ी की गई पार्टी को वे संभाले।
एक समय था जिन कार्यकर्ताओं को लोग नहीं जानते या पहचानते थे उन्हें जोगी जी ने मौका दिया और धीरे धीरे वे काबिल के साथ साथ राजनीतिक बुद्धि वाले भी बन गए। एक समय ऐसा भी था कि क्या बड़े और छोटे सभी जोगी जी के आगे पीछे मंडराते रहते थे।
जोगी जी जब छग के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किये उसके बाद उन्होंने राज्य के विकास, आदिवासियों के विकास, जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य योजना बनाई और उस पर अमली जामा पहनाने हेतु अधिकारियों को लगाए। जोगी जी को बहुत सपोर्ट किये स्वर्गीय तरुण चटर्जी ने जिन्होंने भाजपा से 11 विधायकों को अपने साथ लेकर कांग्रेस प्रवेश किये और जोगी जी को ताकत प्रदान किये और इस कार्य हेतु उन्हें पीडब्लूडी मंत्री के साथ साथ रायपुर महापैर बने रहने का पुरस्कार मिला।
संघर्ष का दूसरा नाम ही अजित जोगी है। जीवटता का दूसरा नाम ही अजित जोगी है। उनका दिमाग, उनकी बुद्धि, उनकी बोलने की शैली को कोई नहीं पा सकता। एक करिश्माई नेता थे। जो भी उनसे मिलते वे उनके कायल हो जाते थे। उनमें एक आकर्षण था। देश के शायद पहले नेता होंगे जिन्होंने एक साथ – इंजीनियर, प्रोफेसर, अधिवक्ता, आईपीएस, आईएएस, एआईसीसी के प्रवक्ता, संसद, विधायक और एक नए राज्य का प्रथम मुख्यमंत्री तक का सफर तय किये। वैसे भी इतिहास के पन्नों में अजित जोगी जी अमर हो गए। जब भी छग प्रदेश का विश्व मे कहीं भी नाम लिया जाएगा तब तब अजित जोगी का प्रसंग उठता रहेगा।
अब आते हैं उस महत्त्वपूर्ण प्रश्न पर की – अब अजित जोगी के बाद कौन ? वैसे तो अजित जोगी जी के जाने के बाद उनका बेटा सुप्रीमों बन सकता है यदि पार्टी परिवारवाद की राह पकड़े। जबकि पार्टी को परिवारवाद का तकमा नहीं लगवाना चाहिए। दूसरी तरफ अमित जोगी के अलावा डॉ रेणु जोगी, धर्मजीत सिंह, अब्दुल हयात, रिज़वी, विधान मिश्रा, योगेश तिवारी व अन्य नेता हैं। लेकिन देखा जाय तो जोगी जी जैसे मिलते गन केवल धर्मजीत सिंह में ही हैं।
धर्मजीत सिंह ने शहीद विद्याचरण शुक्ल की उंगली पकड़कर राजनीति में आये और उन्हें विद्याचरण गट का ही नेता माना जाता था। धीरे धीरे परिदृश्य बदला, वे लोरमी से विधायक बने, छग विधानसभा के उपाध्यक्ष बने और निष्ठा पूर्वक कार्य करते रहे। जब जोगी जी ने कांग्रेस छोड़ा तब वे जोगी जी के साथ हो लिए और 2018 विधानसभा चुनाव में वे लोरमी से भारी वोटों से जीतकर आये। हमेशा वे जोगीजी के साथ साये की तरह रहते थे और जोगी जी के अंतिम पड़ाव तक धर्मजीत उन्ही के साथ ही खड़े रहे।
जिस दिन 2018 विधानसभा चुनाव का नतीजा आया और कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनते दिखी तब ही जोगी खेमे के कुछ नेता, कुछ नामचीन नेता घर वापसी हेतु मन बना रहे थे, बना चुके थे। इन नेताओं में जोगी और उनकी पार्टी के प्रति निष्ठा नहीं दिखी अपितु पद-पावर-प्रतिष्ठा की तरफ निष्ठा दिखी। कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही जोगी खेमा छोड़ सत्ता के खेमे में आ गए और जोगी को छोड़ दिया अकेला। इसके बावजूद जोगी अकेले ही विभिन्न तरीके की लड़ाई लड़े, ये उनका विल पावर ही था जो जोगी को जोगी बनाये रखा।
अजित जोगी जी के परलोक जाने के बाद पार्टी को मजबूती प्रदान करनी होगी साथ ही एक श-सख्त लीडर की जरूरत होगी जो पार्टी को सही दिशा दिखाते हुए तीसरी शाक्ति के रूप में अपना दबदबा कायम रखे।
समय बड़ा बलवान है और दिल्ली अभी दूर है।
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