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कोरोना का बढ़ता भय

खबरीलाल का विशेष लेख: कोरोना वायरस को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन ऐसा माहौल नहीं बनाया जाए कि हर कोई खुद को घर में कैद कर ले। कोरोना वायरस से उपजी खतरनाक बीमारी कोविड-19 के महामारी का रूप ले लेने के बाद दुनिया भर में अफरा-तफरी का जो माहौल बन रहा है, उसे रोकने की उतनी ही जरूरत है, जितनी इस रोग के प्रसार को। यह विचित्र है कि एक ओर बार-बार यह कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से घबराने की जरूरत नहीं और दूसरी ओर ऐसे काम भी किए जा रहे हैं, जिससे दहशत का माहौल बन रहा है।

नि:संदेह लोगों को भीड़-भाड़ से बचने और कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों से दूर रहने के लिए अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन इसके नाम पर ऐसा भी माहौल नहीं बनाया जाना चाहिए कि हर कोई खुद को घर में कैद कर ले। इससे न केवल जनजीवन ठप हो जाएगा, बल्कि अन्य दूसरी समस्याएं भी पैदा हो जाएंगी। बेहतर होगा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन उन तौर-तरीकों को रोकने के लिए सक्रिय हो, जो जाने-अनजाने अफरा-तफरी बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

उसे इसका संज्ञान लेना ही चाहिए कि आखिर अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी छात्रों को अपने-अपने देश लौट जाने का निर्देश क्यों दिया? यदि अमेरिका सरीखा विकसित और हर मायने में सक्षम देश इस तरह के कदम उठाएगा तो इससे दुनिया में घबराहट ही फैलेगी। उसने अपने यहां पढ़ाई कर रहे लाखों विदेश्ाी छात्रों में न केवल घबराहट पैदा करने, बल्कि उन्हें मुसीबत में डालने का ही काम किया है।

अपने देश में भी कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ जाने से सतर्कता बढ़ाने की जरूरत बढ़ गई है। यह अच्छी बात है कि इस सतर्कता का परिचय भी दिया जा रहा है, लेकिन इसी के साथ इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि राज्य सरकारों को सावधानी बरतने के नाम पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं? यह नहीं होना चाहिए कि हर राज्य सरकार अपने हिसाब से फैसले ले। उनके फैसलों में एकरूपता दिखनी चाहिए। ये फैसले ऐसे होने चाहिए जो हालात को नियंत्रित करने का तो काम करें, लेकिन आम लोगों में खौफ न पैदा करें।

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